जिस फूलों की परवरिश हमने अपनी मोहब्बत से की..

जिस फूलों की परवरिश हमने अपनी मोहब्बत से की,
जब वो खुशबू के काबिल हुए तो औरों के लिए महकने लगे।


वक़्त अजीब चीज़ है वक़्त के साथ ढल गए…
तुम भी बहुत बदल गए हम भी बहुत बदल गए…!!


आईना भी भला कब किसको सच बता पाया है।
जब देखा दायाँ तो, बायाँ ही नजर आया है ।।


साथ ताउम्र निभाने वाला कोई नही होता है…
ख़ुद को सदा खुद ही के साथ चलना होता है…!!


आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे


ज़्यादा कुछ नहीं बदला उसके और मेरे,
बीच में पहले नफरत नहीं थी और अब प्यार नहीं है।


हमारी तो तासीर ही यूँ है, तावीजों की तरह…
जिनके भी गले मिलते है, उसकी बरक़त हो जाती है…!!


लग रहा है भूल गए हो शायद,
या फ़िर कमाल का सब्र रखते हो।


कतरा कतरा आग बन के जला रही है यादे तेरी,
बरस के इश्क तू भी दिल की लगी बुझा.


ज़िन्दगी है चार दिन की, कुछ भी न गिला कीजिये
दवा, ज़हर, जाम, इश्क, जो मिले मज़ा लीजिये।


हर किसी के नसीब में कहा लिखी होती हे चाहतें
कुछ लोग दुनिया में आते हे सिर्फ तन्हाइयों के लिए.

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4 Responses

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